हाईकोर्ट सहित अधीनस्थ कोर्ट जरूरी मामलों में ही करेंगी सुनवाई, पक्षकारों के प्रवेश पर पाबंदी

काेराेनावायरस संक्रमण काे देखते हुए 31 मार्च तक हाईकोर्ट सहित प्रदेश के अधीनस्थ कोर्ट जरूरी केसों की ही सुनवाई करेंगे। मंगलवार को सीजे इन्द्रजीत महान्ति ने सुबह 9:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक वीसी के जरिए जयपुर व जोधपुर के जजों की संयुक्त बैठक ली। हाईकोर्ट सहित अधीनस्थ कोर्ट परिसर स्थित चाय और फोटोस्टेट की सभी दुकानों सहित कैंटीन भी बंद रहेंगी। कोर्ट के कार्य व न्यायिक समय में बदलाव नहीं हुआ है। 


दर्शन ऑनलाइन करें, मंदिर न जाएं


कोरोनावायरस के संक्रमण से भक्तों को बचाने के लिए मंदिरों में सभी धार्मिक आयोजन स्थगित कर दिए गए हैं। चैत्र नवरात्र से पूर्व मंदिरों में होने वाले कथा-सत्संग टाल दिए गए हैं। मंदिरों में आरती और भोग का समय भी बहुत संक्षिप्त कर दिया गया है, ताकि भीड़ जमा ना हो। सभी मंदिरों के ट्रस्ट व प्रशासकों ने अपील जारी की है- मंदिर आने से पहले स्वास्थ्य की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। जरूरी हो तो ही घर से निकलें। मंदिरों में भीड़ से बचें और घर में ही पूजा-आरती करें।  

हाईकोर्ट में बेंच के सामने 25 केस ही लिस्टेड होंगे
हाईकोर्ट में एक बेंच के समक्ष 25 केस लिस्टेड होंगे। इनमें से लंच से पहले 12 केसों में सुनवाई होगी और लंच के बाद 13 केसों में सुनवाई होगी। जरूरी केसों में सुनवाई के लिए सबंधित केस के वकील को केस का महत्व बताते हुए उसे लिस्ट करवाना होगा। हाईकोर्ट के हर कोर्ट रूम में सैनेटाइजर की व्यवस्था होगी। खांसी-जुकाम और बुखार से पीड़ित कर्मचारियों को तत्काल डॉक्टर की सलाह लेनी होगी। जब तक बहुत जरूरी न हो तब तक पक्षकारों और केस के ऑफिसर इंचार्ज सहित अफसरों का आना अदालत में मना होगा। वकीलों के निरंतर संपर्क में आने वाले कोर्ट स्टॉफ को मास्क उपलब्ध करवाए जाएंगे और कोर्ट रूम सहित ऑफिस, कुर्सियां, टेबल, दरवाजे, रेलिंग और अन्य वस्तुओं को हर दिन दो बार एक प्रतिशत हायपोक्लोराइड से वायरस मुक्त किया जाएगा। इसके अलावा हाईकोर्ट में पक्षकारों व वकीलों के उपस्थित नहीं होने पर केस में कोई भी खिलाफ आदेश जारी नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट परिसर में गेट संख्या-5 बंद रहेगा। मीडिएशन भी जरूरी केसों ही होगी।
 


हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सेशन कोर्ट में लगी भीड़, लेकिन अब गंभीर


मंगलवार को सेशन कोर्ट परिसर में सैकड़ों लोग एकत्र हुए। कई कोर्टों में डायस के सामने भीड़ दिखाई दी। बड़ी संख्या में गवाह, शिकायतकर्ता, आरोपी, पक्षकार और उनके परिजन कोर्ट परिसर पहुंचे। कई कोर्टों में गवाहों की गवाही रिकॉर्ड पर ली गई। आरोपियों और पक्षकारों की हाजरी दर्ज की गई। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जेल प्रशासन ने कैदियों को कोर्ट में पेशी पर नहीं भेजा।



कलेक्ट्रेट सर्किल स्थित महानगर सेशन न्यायालय आम दिनों की तरह ही काम-काज हुआ। कोर्ट में रोजाना की तरह औसतन छह हजार वकीलों की उपस्थिति रही। अधिवक्ताओं के अनुसार पारिवारिक न्यायालय प्रथम, द्वितीय, तृतीय, पोक्सो-6, पोक्सो जिला, एडीजे-सात, तेरह, उन्नीस, महिला उत्पीड़न प्रथम, द्वितीय, एसीएमएम- छह, आठ, एमएम-11 और 20 में गवाही दर्ज की गई। किसी भी कोर्ट ने पेशी पर आए लोगों को ना तो वापस भेजा, ना ही अधिवक्ताओं को पक्षकारों को कोर्ट में अनावश्यक पेश करने से रोका। विभिन्न स्थानों पर अधिवक्ता और लोग महामारी पर चर्चा करते दिखाई दिए, जो परिसर में एकत्र भीड़ पर आशंकाएं जता रहे थे। दूसरी ओर कोर्ट परिसर स्थित कैदियों की बैरक खाली रही। जेल में कैदियों को बस में बैठा लिया गया। उसी समय हाईकोर्ट का परिपत्र मिलने पर कैदियों को बस से उतार लिया गया। जेल अधीक्षक राकेश मोहन के अनुसार कोर्ट द्वारा बुलवाए जाने पर ही अभियुक्तों को पेशी पर भेजा जाएगा।


अधीनस्थ कोर्ट में जमानत-स्टे की ही सुनवाई


अधीनस्थ कोर्ट में भी 31 मार्च तक केवल जमानत, स्टे और रिमांड इत्यादि जरूरी केसों की ही सुनवाई होगी। न्यायिक या पुलिस रिमांड के लिए लाए जाने वाले बंदियों को एक घंटे के भीतर वापस ले जाना होगा। बुधवार से जयपुर में जिला अदालत परिसर के केवल दो गेट खुले रहेंगे। सभी कैंटीन बंद रहेंगी। वकीलों को जरूरी होने पर ही कोर्ट आने और जल्दी लौट जाने को कहा गया है। 
 


वकीलों को बताना होगा- जरूरी क्यों है केस
हाईकोर्ट ने अर्जेंट केस सूचीबद्ध करने के लिए जोधपुर-जयपुर मुख्य पीठ में न्यायिक अधिकारी तय किए हैं। खंडपीठ की याचिका, खंडपीठ के आपराधिक मामले, विशेष अपील और सिविल अपीलों के लिए रजिस्ट्रार नियम, एकलपीठ के आपराधिक मामलों के लिए रजिस्ट्रार वर्गीकरण और एकलपीठ से संबंधित याचिका तथा सिविल वाद के लिए रजिस्ट्रार न्यायिक को जिम्मेदारी दी गई है। वकीलों को सुबह 10:30 बजे से 12 बजे तक अपने केस की अर्जेंसी बताते हुए एक प्रफोर्मा में भरकर देना होगा। इसके बाद न्यायिक अधिकारी ही केस के संबंध में निर्णय लेकर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश देंगे।